एक प्रश्न
सब कहते हैं कि सिंदूर औरत का सबसे सुन्दर श्रृंगार है सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, पायल बिछिया से ही उसका संसार है; बाल लंबे घने काले हो, बदन गठीला व दूध से धुला हो, सुरमई आंखों में काजल लगी हो, लब सुर्ख लाल रंगे हो, नाक पे नथ और कानों में चमकदार झुमके जगमगाते हो, नाखून सारे रंगे हो, हथेलियों पे मेंहदी की लालिमा चढ़ी हो, गले में मंगलसूत्र और मांग के सिंदूर पे मांग टीका सजी हो, बाजूबंद, कमरबंद, चूड़ी, अंगूठी, बिछिया, पायल सब हो, पर हो ही न अगर पिया का साथ तो इन सबका क्या हो? सारे व्रत व त्यौहार सिर्फ पतियों और पुत्रों के लिए होते हैं तीज, वट सावित्री, मधुश्रावणी, करवाचौथ या जीतिया, हर पूजा पे नाम है बस पुरुष तत्व का जो नियम बनाते हैं और जिनका पालन श्रृंगार में लिप्त महिलाएं करती हैं; माना कि व्रत व पूजन अटूट प्रेम की लौ जलाए रखती है, आस्था के माध्यम से आपसी विश्वास बनाए रखती है पर ये सिर्फ एक पक्ष के लिए क्यों, क्या पत्नी कुछ नहीं चाहती है? सती बने पत्नी तो क्या पति वो सतवान नहीं चाहती है? यदि सीता हो पत्नी तो क्या पति में राम को नहीं चाहती है? कौन है यहां मन्दोदरी जो पति रावण...